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ग़ज़ल

4.5
3110

अपनी बातोँ मेँ असर पैदा कर तू समन्दर सा जिगर पैदा कर । बात इक तरफा बनेगी न कभी जो इधर है वो उधर पैदा कर । कुछ भरोसा ही नहीँ सूरज का तू नई रोज़ सहर पैदा कर । बात है मीर मेँ जो ग़ालिब मेँ शायरी मेँ वो ...

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लेखक के बारे में
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शरद तैलँग

ग़ज़लकार, सुगम सँगीत गायक, कवि एवँ व्यँग्यकार । एक व्यँग्य सँकलन " गुस्से मेँ है भैँस" प्रकाशित । प्रसिद्ध कार्यक्रम " कौन बनेगा करोड्पति " मेँ अमिताभ बच्चन द्वारा सुनाये जाने वाले " चन्द केबीसी छन्द" के रचयिता । अनेक साहित्य सम्मान से सम्मानित । वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा राजस्थान के "कुलगीत" के रचयिता एवँ सँगीत निर्देशक । Blog : www.sharadtkritya.blogspot.com www.sharadvyang.blogspot.com email : [email protected] सम्पर्क : 240 माला रोड (हाट रोड) कोटा जँ 324002 राजस्थान भारत मोबाइल : 09829903244

समीक्षा
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  • author
    vipin kumar
    05 दिसम्बर 2018
    तुझे और सीखने की जरूरत है, अपने जज्बातो को काबू करने की जरूरत है। कुछ जमाने ने सिखया भी पर कुछ अपना भी करने की जरूरत है।
  • author
    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    04 अप्रैल 2020
    वाह वाह।मेरी रचनाये भी पढे व अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे ।
  • author
    20 जनवरी 2018
    Bahut umda waaaaaaaaaaah bhai लाजवाब है
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    vipin kumar
    05 दिसम्बर 2018
    तुझे और सीखने की जरूरत है, अपने जज्बातो को काबू करने की जरूरत है। कुछ जमाने ने सिखया भी पर कुछ अपना भी करने की जरूरत है।
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    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    04 अप्रैल 2020
    वाह वाह।मेरी रचनाये भी पढे व अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे ।
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    20 जनवरी 2018
    Bahut umda waaaaaaaaaaah bhai लाजवाब है