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घर परिवार

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परिवार मेरा है नर्म सवेरा हर रिश्ते जहाँ करते बसेरा धूप छांव का जहां लगता डेरा वह प्यारा घर परिवार है मेरा जहां बहती है प्रेम की अविरल गंगा नहीं स्वार्थों का कोई दंगा मेरे परिवार को देखकर हर कोई ...

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लेखक के बारे में
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REKHA VERMA

प्रतिलिपि पर सफर की शुरुआत जून 2019 सुख दुख में तेरा साथ हो । हाथों में तेरा हाथ हो । जीवन के अंतिम सफर में । हे मुरली वाले लबों पर बस तेरा नाम हो । जयपुर ( राजस्थान )

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    01 फ़रवरी 2022
    बेहतरीन रचना लिखा आपने मेम,,, अपने परिवार और अपने मनोभावों को सुंदर शब्दों में उकेरा है।🙏 राधे-राधे 🙏✍️💐🌹💐
  • author
    Ram Pratap Prasad
    01 फ़रवरी 2022
    बहुत सुंदर रचना जिसमें घर परिवार को बड़े ही मनोहारी ढंग से उकेरा है आपने 🙏
  • author
    Arti Pandey "Pandey"
    01 फ़रवरी 2022
    बहुत ही खूबसूरत कविता परिवार पर आपने बहुत बहुत धन्यवाद
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    01 फ़रवरी 2022
    बेहतरीन रचना लिखा आपने मेम,,, अपने परिवार और अपने मनोभावों को सुंदर शब्दों में उकेरा है।🙏 राधे-राधे 🙏✍️💐🌹💐
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    Ram Pratap Prasad
    01 फ़रवरी 2022
    बहुत सुंदर रचना जिसमें घर परिवार को बड़े ही मनोहारी ढंग से उकेरा है आपने 🙏
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    Arti Pandey "Pandey"
    01 फ़रवरी 2022
    बहुत ही खूबसूरत कविता परिवार पर आपने बहुत बहुत धन्यवाद