pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

ग़ज़ल

4.7
708

बहुत शहरी से क्यों लगते हो तुम, अपना गाँव कहीँ जंगल में छुपाया होगा तुमने । ये बुलंदी तुम्हारे आशियाने की कहती है झोपड़ियों को बहुत गहरे दबाया होगा तुमने l कत्ल करो या कातिल कहे जाओ, पाक साफ हो, ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
विवेक शाही

Assistant Professor Psychology

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    विवेक पाण्डेय
    27 अक्टूबर 2018
    जितनी भी बार पढ़ लूँ आपको, मन नहीं भरता।
  • author
    Soni Mishra
    16 मार्च 2023
    story achi hai
  • author
    Vijay Kumar R
    16 अक्टूबर 2018
    achchhi hai
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    विवेक पाण्डेय
    27 अक्टूबर 2018
    जितनी भी बार पढ़ लूँ आपको, मन नहीं भरता।
  • author
    Soni Mishra
    16 मार्च 2023
    story achi hai
  • author
    Vijay Kumar R
    16 अक्टूबर 2018
    achchhi hai