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गजल

4.2
749

हर हाथ में पत्थर दिखता है। यह कौन सा मंज़र दिखता है।। है हाथ में उसके फूल मगर। पहलू में ख़न्जर दिखता है।। मुस्कान अवाम के लब पर है। कुछ दूर पे दफ्तर दिखता है।। एक चाँद सा चिह्ररा रात गये। खिड़की पे ...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    27 जून 2022
    शुक्रिया प्रतिलिपि परिवार
  • author
    Shaikh Tabbu
    24 जून 2022
    👍
  • author
    17 दिसम्बर 2018
    खूबसूरत
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    27 जून 2022
    शुक्रिया प्रतिलिपि परिवार
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    Shaikh Tabbu
    24 जून 2022
    👍
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    17 दिसम्बर 2018
    खूबसूरत