pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

गंदी शायरी

482
3

रात में मिलते हो मेरे जिस्म को गरमा जाते हो। कभी मैं तुम्हारे ऊपर सोती हूं कभी तुम मेरे ऊपर सोते हो। आह उह की आवाज आती है। कुछ पल में ही तुम थक जाते हो। लिप से लिप को मेरे तूने सट्टाया।। जिस्म से ...