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गाँधी की चुप्पी

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गांधी की चुप्पी (अन्ना हजारे के सन्दर्भ में ) " यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत :" लगा यह श्लोक चरितार्थ होने वाला है , पाप का घड़ा भी इतना भर गया कि फूटने वाला है और यह भी लगा कि कोई मसीहा ...

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अन्नदा पाटनी
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  • author
    Anup Kumar
    14 जून 2020
    अन्ना पाटनी की कविता " गाँधी की चुप्पी " अन्ना हजारे के केन्द्र बिन्दु पर रख कर लिखी गई है.इस कविता के माध्यम से कवि ने यह बताने की प्रयास की है कि बाबू का सत्य आहिंसा सिर्फ किताबों मे सिमट कर रह गयी है.अन्ना हजारे जो गांधी जी के अनुयायी है जिन्होंने उस समय देश की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थिति बहुत ही खराब हो रही थी.मानवाधिकारों का हनन हो रहा था।.ऐसी परिस्थिति मे श्री अन्ना हजारे ने देश की गांधीजी के मार्ग मे लाने के लिये देश मे एक जन आन्दोलन चलाये जो अनशन के माध्यम से सरकार को जगाने के लिए था, इन आन्दोलन मे उनके साथ उस समय के कुछ नेता उनके सहयोग के लिए आगे आये जिनकी छवि बहुत ही स्वच्छ थे ,वे देश के प्रति समर्पित थे.हाँलाकि उस आन्दोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा. यह आन्दोलन से देशवासियो मे यह उम्मीद जगी कि अब नया भारत का निमार्ण होगा. यह ठीक कहा गया कि आदमी पैसा और सत्ता के लोभ मे सब कुछ भूल जाता है वही हुआ जो भारत का इतिहास रहा.अन्ना जिसके अगुवाई पर यह अन्दोलन चला उन्हीं को लोग भूल गये या दरकिनार कर दिया गया.हालांकि मै यह नही कहता हूँ उस आन्दोलन मे सभी वेसे ही मानसिकता के थे. जो अच्छे लोग थे वे अपने को इससे दूर हो गये. आज लोग अन्ना हजारे को लोग भूल गये आज वे किसी अंधेरे कोने मे पढ़ें है.यही हाल श्री जय प्रकाश नारायण ने आपतकाल के समय जन आन्दोलन के बाद भारत को नयी दिशा दिये. उन्हें भी इसी तरह भुला दिया गया.कवित्रयी ने गीता का एक श्लोक लिखी है.उस श्लोक से उनकी कविता सार्थक हो गयी उन्हें मेरी। ओर से ढेर सारी बधाई. शेष फिर। कभी. अनुप। कुमार.. वन विभाग, राँची..878 936 9681.
  • author
    Megha Apte
    09 जुलाई 2016
    Such a beautiful naration of the SAD situation in our country!! Very well written!!
  • author
    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    10 फ़रवरी 2020
    अच्छी रचना ।मेरी रचनाये भी पढे व अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे ।
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    Anup Kumar
    14 जून 2020
    अन्ना पाटनी की कविता " गाँधी की चुप्पी " अन्ना हजारे के केन्द्र बिन्दु पर रख कर लिखी गई है.इस कविता के माध्यम से कवि ने यह बताने की प्रयास की है कि बाबू का सत्य आहिंसा सिर्फ किताबों मे सिमट कर रह गयी है.अन्ना हजारे जो गांधी जी के अनुयायी है जिन्होंने उस समय देश की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थिति बहुत ही खराब हो रही थी.मानवाधिकारों का हनन हो रहा था।.ऐसी परिस्थिति मे श्री अन्ना हजारे ने देश की गांधीजी के मार्ग मे लाने के लिये देश मे एक जन आन्दोलन चलाये जो अनशन के माध्यम से सरकार को जगाने के लिए था, इन आन्दोलन मे उनके साथ उस समय के कुछ नेता उनके सहयोग के लिए आगे आये जिनकी छवि बहुत ही स्वच्छ थे ,वे देश के प्रति समर्पित थे.हाँलाकि उस आन्दोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा. यह आन्दोलन से देशवासियो मे यह उम्मीद जगी कि अब नया भारत का निमार्ण होगा. यह ठीक कहा गया कि आदमी पैसा और सत्ता के लोभ मे सब कुछ भूल जाता है वही हुआ जो भारत का इतिहास रहा.अन्ना जिसके अगुवाई पर यह अन्दोलन चला उन्हीं को लोग भूल गये या दरकिनार कर दिया गया.हालांकि मै यह नही कहता हूँ उस आन्दोलन मे सभी वेसे ही मानसिकता के थे. जो अच्छे लोग थे वे अपने को इससे दूर हो गये. आज लोग अन्ना हजारे को लोग भूल गये आज वे किसी अंधेरे कोने मे पढ़ें है.यही हाल श्री जय प्रकाश नारायण ने आपतकाल के समय जन आन्दोलन के बाद भारत को नयी दिशा दिये. उन्हें भी इसी तरह भुला दिया गया.कवित्रयी ने गीता का एक श्लोक लिखी है.उस श्लोक से उनकी कविता सार्थक हो गयी उन्हें मेरी। ओर से ढेर सारी बधाई. शेष फिर। कभी. अनुप। कुमार.. वन विभाग, राँची..878 936 9681.
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    Megha Apte
    09 जुलाई 2016
    Such a beautiful naration of the SAD situation in our country!! Very well written!!
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    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    10 फ़रवरी 2020
    अच्छी रचना ।मेरी रचनाये भी पढे व अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे ।