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गली में खेलती वो लड़की

4.1
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गली में खेलती वो लड़की कई आँखों के केंद्र में है | कुछ आँखों के लिए वो सरसरी भर है कुछ दूरबीन लगाए बैठी हैं देखती रहती हैं उसकी हर छोटी-बड़ी चपलता कुछ आँखों के लिए वो किरकिरी है लगातार बदलती हवा का ...

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लेखक के बारे में
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सोमेश कुमार

नाम –सोमेश कुमार जन्म तिथि -04/01/1985 व्यवसाय-अध्यापन लेखन क्षेत्र –लघुकथा/बालकथा ,कविता/बालगीत ,कहानी मोबाइल नम्बर -8510003806 निवास –ए-716 /18 ,महावीर एन्क्लेव -2 ,नई दिल्ली -110059 [email protected] f-book-http://www.facebook.com/someshkumar.raghuvanshi

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Nivedita Singh
    07 जून 2015
    अच्छा नहीं होता / लड़कियों को इतनी छूट का मिलना / इसीकारण, उसकी माँ उसे देती रहती है नसीहतों के घूँट | कितने काम शब्दों में आज की सच्चाई का बयान  कर दिया है आपने  
  • author
    Ankur Rattan
    06 दिसम्बर 2018
    बहुत ही कम शब्दों में आपने समाज के आधे हिस्से की स्थिति को बहुत ही सुंदर प्रकार से दर्शाया है। सराहनीय।
  • author
    Ravindra N.Pahalwam
    26 सितम्बर 2018
    कितनी लड़कियों गली में खेल पाती हैं ? सही जगह ध्यान आकर्षित किया है. सराहनीय
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    Nivedita Singh
    07 जून 2015
    अच्छा नहीं होता / लड़कियों को इतनी छूट का मिलना / इसीकारण, उसकी माँ उसे देती रहती है नसीहतों के घूँट | कितने काम शब्दों में आज की सच्चाई का बयान  कर दिया है आपने  
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    Ankur Rattan
    06 दिसम्बर 2018
    बहुत ही कम शब्दों में आपने समाज के आधे हिस्से की स्थिति को बहुत ही सुंदर प्रकार से दर्शाया है। सराहनीय।
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    Ravindra N.Pahalwam
    26 सितम्बर 2018
    कितनी लड़कियों गली में खेल पाती हैं ? सही जगह ध्यान आकर्षित किया है. सराहनीय