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सुधीन्द्र, जब यह पत्र तुम्हें मिलेगा , मैं तुम्हारे जीवन से बहुत दूर जा चुकी हूँगी । मेरे पैरों में इतने वर्षों से बँधी जंजीर खुल चुकी होगी । मेरे पैर परों-से हल्के लग रहे होंगे और किसी भी रास्ते पर ...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shalini
    07 अगस्त 2019
    अच्छी रचना मगर क्या जीवन त्याग देना ही एक मात्र विकल्प है, जो जन्म ईश्वरने हमे दिया है उसका अंत करना परमपिता का निरादर नही है क्या ???
  • author
    Girraj Khandelwal
    20 जुलाई 2020
    कहानी अच्छी है पर अलग होने का निर्णय देर से लिया गया है ।
  • author
    sushma pandey
    21 नवम्बर 2016
    :) ye kahani SIRF kahani nahi lagti ... .+~!^^@'{!+-:^!+-:+
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  • author
    Shalini
    07 अगस्त 2019
    अच्छी रचना मगर क्या जीवन त्याग देना ही एक मात्र विकल्प है, जो जन्म ईश्वरने हमे दिया है उसका अंत करना परमपिता का निरादर नही है क्या ???
  • author
    Girraj Khandelwal
    20 जुलाई 2020
    कहानी अच्छी है पर अलग होने का निर्णय देर से लिया गया है ।
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    sushma pandey
    21 नवम्बर 2016
    :) ye kahani SIRF kahani nahi lagti ... .+~!^^@'{!+-:^!+-:+