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फ्रेंडशिप डे

3.6
928

इस दौर ए जदीदी में हम पीछे क्यूँ रहें, पता है न चाँद तुमको फ्रेंडशिप डे मनाने का हुआ है नया चलन जमाने में, अगस्त के पहले इतवार को इस बार भी मनाया जा रहा है फ्रेंडशिप डे. यूं करो चाँद, उतर आओ जीने से...

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लेखक के बारे में

अजीतपाल सिंह दैया अहमदाबाद (गुजरात) के रहने वाले हैं और जोधपुर के एम बी एम इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक हैं। कविता, कहानी, लघुकथा और उपन्यास लेखन जैसी विधा में लिखते रहें हैं। हिन्दी के अलावा अंग्रेज़ी, उर्दू और राजस्थानी भाषा में लेखन करते हैं। एक उपन्यास Estranged प्रकाशित हुआ है। दो कविता संग्रह 'अप्पो दीपो भव" एवं ‘फ़िलहाल’ प्रकाशित। प्रेम कहानियों की किताब "रूमान" प्रकाशित।इसके अलावा छिटपुट रचनाएँ राजस्थान पत्रिका, इतवारी पत्रिका, बालहंस, लोटपोट, जलते दीप, अकादमी कृति आदि में प्रकाशित। आकाशवाणी जोधपुर से कवितायें और सामाजिक विषयों पर वार्ताएं प्रसारित। लेखन के अतिरिक्त वह स्केचिंग, पेंटिंग और कार्टून बनाने का शौक रखते हैं। दैया की रचनाएँ ब्लॉग poetry-ajit.blogspot.in पर भी पढ़ी जा सकती हैं  

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    सरिता कुमारी
    13 अक्टूबर 2015
    सहज सरल ढ़ंग से दुनियावी प्रेम का सच बताती कविता। बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।
  • author
    Amit Bhati
    15 अक्टूबर 2015
    वाह।।। दोस्ती की अभिव्यक्ति को बहुत बेहतर तरीके से पेश किया है।।
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    24 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा का पूर्ण अनुसरण न करती एक नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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    सरिता कुमारी
    13 अक्टूबर 2015
    सहज सरल ढ़ंग से दुनियावी प्रेम का सच बताती कविता। बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।
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    Amit Bhati
    15 अक्टूबर 2015
    वाह।।। दोस्ती की अभिव्यक्ति को बहुत बेहतर तरीके से पेश किया है।।
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    24 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा का पूर्ण अनुसरण न करती एक नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।