अंग-अंग सारा टूटता,छलनी हुआ शरीर कब छोड़ोगे बोलना ,अपना है कश्मीर जग सारा अब जानता,'पाक' नही करतूत भीतर से हर आदमी,छिपा हुआ बारूद जिस झंडे की साख हो ,बुलंद सितारे-चाँद झुक क्यूँ आखिर वो रहा,शरीफजादा...

प्रतिलिपिअंग-अंग सारा टूटता,छलनी हुआ शरीर कब छोड़ोगे बोलना ,अपना है कश्मीर जग सारा अब जानता,'पाक' नही करतूत भीतर से हर आदमी,छिपा हुआ बारूद जिस झंडे की साख हो ,बुलंद सितारे-चाँद झुक क्यूँ आखिर वो रहा,शरीफजादा...