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फिर से जब रिश्ते महकेंगे

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कैसा होगा, फिर से जब रिश्ते महकेंगे अपनेपन से. दूर-दूर ही सही मगर अकुलाहट होगी कलियों-फूलों को मिलने की चाहत होगी गलबहियों में नहीं औपचारिकता होगी झूठे मन से. जब संबंधों में सच्ची गरमाहट होगी...

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लेखक के बारे में
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जगदीश पंकज

पूरा नाम : जगदीश प्रसाद जैन्ड जन्म : 10 दिसम्बर 1952 स्थान : पिलखुवा, जिला-गाज़ियाबाद (उ .प्र .) शिक्षा : बी .एससी . विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में गीत एवं कवितायें प्रकाशित, एक नवगीत संग्रह प्रकाशनाधीन सम्प्रति : सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में वरिष्ठ प्रबन्धक के पद से सेवानिवृत्त एवं स्वतंत्र लेखन संपर्क: सोमसदन ,5/41 सेक्टर -2 , राजेन्द्रनगर,साहिबाबाद , गाज़ियाबाद-201005 . मो . 08860446774 e-mail: jpjend@yahoo.co.in

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Arvind Sinha
    08 मई 2022
    सुन्दर अभिव्यकि ।
  • author
    Kamlesh Anand
    16 मई 2021
    very good👍💯😘
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    27 अप्रैल 2020
    सुन्दर अभिव्यक्ति ।
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  • author
    Arvind Sinha
    08 मई 2022
    सुन्दर अभिव्यकि ।
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    Kamlesh Anand
    16 मई 2021
    very good👍💯😘
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    अरविन्द सिन्हा
    27 अप्रैल 2020
    सुन्दर अभिव्यक्ति ।