फिर खुला है दर-ए-अदालत-ए-नाज़ गर्म बाज़ार-ए-फ़ौजदारी है हो रहा है जहाँ में अँधेर ज़ुल्फ़ की फिर सरिश्तादारी है फिर दिया पारा-ए-जिगर ने सवाल एक फ़रियाद-ओ-आह-ओ-ज़ारी है फिर हुए हैं गवाह-ए-इश्क़...

प्रतिलिपिफिर खुला है दर-ए-अदालत-ए-नाज़ गर्म बाज़ार-ए-फ़ौजदारी है हो रहा है जहाँ में अँधेर ज़ुल्फ़ की फिर सरिश्तादारी है फिर दिया पारा-ए-जिगर ने सवाल एक फ़रियाद-ओ-आह-ओ-ज़ारी है फिर हुए हैं गवाह-ए-इश्क़...