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फीकी चाय

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आज की फीकी चाय कल बदल सकती है मीठी चाय में मीठी चाय के सफर में जो महसूस ना हो मीठेपन की पी लेना चाहिए एक फीकी चाय ...

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लेखक के बारे में

मैं स्वयं को जीवन-पथ पर निरंतर आगे बढ़ता हुआ एक यात्री मानता हूँ। यह यात्रा किसी निश्चित मंज़िल की ओर नहीं, बल्कि अनुभवों, संवेदनाओं और आत्मबोध की ओर अग्रसर होती है। इस मार्ग पर चलते हुए जो कुछ देखता, समझता और महसूस करता हूँ, उसे अपने टूटे-फूटे, साधारण और सहज शब्दों में पिरोने का प्रयास करता हूँ। मेरे लिए लेखन शब्दों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मन के भीतर उठती हलचल, संघर्ष और सीख को ईमानदारी से अभिव्यक्त करने का माध्यम है। संभव है मेरे शब्द अलंकृत न हों, पर वे जीवन की सच्चाई और अनुभूति की गर्माहट अपने भीतर समेटे रहते हैं। लेखन की यह यात्रा औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मिक है। वर्ष 2018 से मैं ‘प्रतिलिपि’ मंच पर नियमित रूप से लिखता आ रहा हूँ, जहाँ मेरे विचारों को दिशा मिली और मेरी भावनाओं को पाठकों का साथ। इस मंच ने मुझे यह समझने का अवसर दिया कि लेखन केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज, समय और विचारों से संवाद स्थापित करने का सशक्त साधन भी है। हर रचना मेरे अनुभवों का एक छोटा-सा पड़ाव है, जो मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मेरा जन्म स्थान और कर्मभूमि पटना, बिहार रहा है। पटना ने मुझे शिक्षा, संघर्ष और व्यावहारिक जीवन की समझ दी। वहीं मेरी गृहभूमि दरभंगा, बिहार है, जिससे मेरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव गहराई से जुड़ा हुआ है। दरभंगा मेरी जड़ों, परंपराओं और स्मृतियों का प्रतीक है, जहाँ से मेरी संवेदनशीलता और सोच को आकार मिला। इन दोनों स्थानों का प्रभाव मेरे व्यक्तित्व और लेखन में स्पष्ट रूप से झलकता है। एक ओर आधुनिक जीवन की व्यस्तता और दूसरी ओर मिट्टी से जुड़ी सादगी—इनके बीच संतुलन बनाते हुए मैं अपनी यात्रा जारी रखे हुए हूँ। यही यात्रा मेरे शब्दों को अर्थ देती है और मुझे निरंतर लिखते रहने की प्रेरणा प्रदान करती है।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    31 दिसम्बर 2023
    ओहो सुबह सुबह चाय की मिठी खुशबू.... सुप्रभात हेमंतजी 🍵🍵🙏🙏सुंदर पेशकश
  • author
    Mithlesh Azad
    31 दिसम्बर 2023
    वाह बहुत सुंदर
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    31 दिसम्बर 2023
    ओहो सुबह सुबह चाय की मिठी खुशबू.... सुप्रभात हेमंतजी 🍵🍵🙏🙏सुंदर पेशकश
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    Mithlesh Azad
    31 दिसम्बर 2023
    वाह बहुत सुंदर