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फैसला

4.5
17070

‘‘हाँ तो जज साहब ! क्या फैसला है आपका।’’ विद्रपू सी मुस्कान लिये रश्मि ने विशाल से पूछा। विशाल ने मार्मिक नजर व आहत भाव से रश्मि को देखा और खामोश हो वहाँ से उठ गया। ‘‘बताईये ना ! दुनिया को फैसला ...

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ज्योति जैन
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Meenaxi Sukhwal
    03 अगस्त 2019
    सच है स्त्रियाँ अब कानून का दुरूपयोग कर घरों को बर्बाद कर रही हैं
  • author
    Vinoo Gadroo
    07 फ़रवरी 2020
    कहानी औरतों का वह चेहरा दिखाती है जो दुनिया जानती है पर कानून तो नारी को ही सच्चा मानता है इसलिए कानून को एक प्रताड़ित आदमी नहीं दिखता. मेरी मर्दों को सलाह है कि अपने घर की नारी को भरपूर सम्मान, प्यार और देखभाल दे परन्तु मूर्ख न बने.
  • author
    Deepshikha Jaiswal
    10 अप्रैल 2017
    यकीनन आज के दौर मे पुरुष भी प्रताड़ित हो रहे है...पर समाज महिलाओ की प्रताड़ना को ही समझता है....फैसला तो सही लिया पर काफी देर मे जब सब कुछ गबा दिया.... excellent story.... mirror of our society
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    Meenaxi Sukhwal
    03 अगस्त 2019
    सच है स्त्रियाँ अब कानून का दुरूपयोग कर घरों को बर्बाद कर रही हैं
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    Vinoo Gadroo
    07 फ़रवरी 2020
    कहानी औरतों का वह चेहरा दिखाती है जो दुनिया जानती है पर कानून तो नारी को ही सच्चा मानता है इसलिए कानून को एक प्रताड़ित आदमी नहीं दिखता. मेरी मर्दों को सलाह है कि अपने घर की नारी को भरपूर सम्मान, प्यार और देखभाल दे परन्तु मूर्ख न बने.
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    Deepshikha Jaiswal
    10 अप्रैल 2017
    यकीनन आज के दौर मे पुरुष भी प्रताड़ित हो रहे है...पर समाज महिलाओ की प्रताड़ना को ही समझता है....फैसला तो सही लिया पर काफी देर मे जब सब कुछ गबा दिया.... excellent story.... mirror of our society