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एक युद्ध है, जो स्वयं के विरुद्ध है।

2.5
6

एक युद्ध है, जो स्वयं के विरुद्ध है। मानो या ना मानो, यह एक रणयुद्ध है।। अगर मै समाधान नहीं तो, खुद एक समस्या हूं। इस युद्ध से परे नहीं, मै अधीनस्थ हूं।। ये युद्ध के वीर ठहर जा, रुक जा, संभल जा। ...

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लेखक के बारे में
author
ajay kumar

।।न कदापि स्वप्नदर्शनात्विरमिष्यामि।।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    VIPIN LAKHERA
    01 जनवरी 2021
    बहर में लिखे तो ज्यादा बेहतर हो
  • author
    Akhi Yadav
    13 नवम्बर 2020
    उम्दा रचना है ...
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    VIPIN LAKHERA
    01 जनवरी 2021
    बहर में लिखे तो ज्यादा बेहतर हो
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    Akhi Yadav
    13 नवम्बर 2020
    उम्दा रचना है ...