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एक था गुल, ओर एक थी बुलबुल ...!!

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एक था गुल और एक थी ... आप सभी को पता है की सन 1965 में शशि कपूर और नंदाजी अभिनित असीम प्रेम से भरी फिल्म "जब जब फूल खिले" आई थी। इस फिल्म का प्रत्येक गीत बड़े ही रोचक और मनोरंजक थे। लेकिन उन सभी...

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लेखक के बारे में
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Mahendra Amin

મસ્ત રહેવું, સ્વસ્થ રહેવું, હંમેશાં Positive રહેવું, જિંદગી મળી છે તો જગમાં હેત પ્રીતથી જીવી લેવું. जिंदगी मिली है तो देनेवालों के साथ मस्ती से जियो। उनके लिए समय का योगदान करो। हमारा कुछ भी था ही नहीं, है भी नहीं और होगा भी नहीं। क्या लेना और क्या देना सब उनका है। तेरा कुछ नहीं। व्यर्थ भागता फिरता हो। उनका बनकर तो देख ...

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    mohan lal
    28 मार्च 2024
    🙏🙏🌺🌺💐💐बहुत ही सार्थक भजन किया है आपने आप महान रचनाकार हो, मेरी रचना भी पढ़ें, 🙏💐 आशीर्वाद के रूप में प्रोत्साहन राशि जरूर दें, 🙏💅🙏🌺🌺🙏🌺🙏💐🙏🌺🌺🙏🌺
  • author
    Dr. Sunil Kr. Mishra
    30 मार्च 2024
    वाह, बहुत ही बेहतरीन एवम भावपूर्ण अभिव्यक्ति आपकी, लाजवाब विश्लेषण किया है आपने, शानदार भाषा शैली एवम उत्कृष्ट लेखन आपका आदरणीय।
  • author
    geeta srivastava
    28 मार्च 2024
    वाह!! मजा आ गया। आज का शीर्षक देखकर मुझे भी यह गीत याद आया था। मुझे भी यह गीत बहुत पसंद है। 👌👌
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    mohan lal
    28 मार्च 2024
    🙏🙏🌺🌺💐💐बहुत ही सार्थक भजन किया है आपने आप महान रचनाकार हो, मेरी रचना भी पढ़ें, 🙏💐 आशीर्वाद के रूप में प्रोत्साहन राशि जरूर दें, 🙏💅🙏🌺🌺🙏🌺🙏💐🙏🌺🌺🙏🌺
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    Dr. Sunil Kr. Mishra
    30 मार्च 2024
    वाह, बहुत ही बेहतरीन एवम भावपूर्ण अभिव्यक्ति आपकी, लाजवाब विश्लेषण किया है आपने, शानदार भाषा शैली एवम उत्कृष्ट लेखन आपका आदरणीय।
  • author
    geeta srivastava
    28 मार्च 2024
    वाह!! मजा आ गया। आज का शीर्षक देखकर मुझे भी यह गीत याद आया था। मुझे भी यह गीत बहुत पसंद है। 👌👌