pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

ek pyari si dost

4
154

रात को तुम्हे गुड़ निनी बोल के सुलाना  बिना किसी इन्तजार के सुबह तुम्हारा गुड़ मॉर्निंग आना , ऑफिस पहुचने से पहले गाडी धीमी चलाना की हिदायत देना घर पहुंचने से पहले मोबाइल पर घर पहुंच गए लिखा होना सोचता...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Rudra Pratap Singh

खुद का तो कुछ पता नही बस हर दिन रहते है तैयार आशियां बदलने को ......Follow me on Instagram rudra.singhofficial थोड़ा गुम सुम रहता ,न किसी से कुछ कहता हूँ, बस अपनी ही बातों में मद मस्त रहता हूँ, कानो में बाजे लगाए बस गानें सुनते रहते हूँ, किसी से न कुछ कहना न किसी का कुछ सुनना बस अपनी ही धुन में कुछ नए ख़्वाब बुनता रहता हूँ, थोड़ा शर्मिला हूँ पर दोस्ती में बहुत लचीला हूँ, मेरे दोस्त बहुत हैं पर कुछ खास नहीं क्योंकि उनको लगेगा है मेरी दोस्ती में कोई बात नहीं, क्योंकी उन्हैं मेरा लिखा हुआ पड़ने की अदालत, उनके हिसाब से में बहुत लिखता अब उन्हें ये कौन बताए में खुद को कहां अच्छा कहता हूँ, न किसी से लड़ना न किसी से झगड़ना बस चुप चाप रहना , हाँ में थोड़ा औरों से अलग हूँ, इसलिए सबके लिए पागल हूँ, क्योंकि में रुद्रा हूँ।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Swarup Acharya
    23 फ़रवरी 2019
    sahi hai
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Swarup Acharya
    23 फ़रवरी 2019
    sahi hai