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एक मई का दिन

4.7
179

कुछ भी तो ठीक नहीं इस दौर में  ! वक्त सहमा हुआ … एक जगह ठहर गया है !! जैसे घडी की सुइयों को किसी अनजान भय ने अपने बाहुपाश में बुरी तरह जकड रखा हो !! व्यवस्था ने कभी भी व्यापक फलक नहीं दिया श्रमिकों ...

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लेखक के बारे में

जन्म: 24 जुलाइ 1971, दिल्लीशिक्षा: दिल्ली विश्विद्यालय से स्नातकभाषा अधिकार: हिन्दी, उर्दू, गढ़वाली बोली उत्तरांचाली साहित्य संस्थान के संस्थापक कथा संसार में उपसंपादक, आर्ट्स कॉलिंग आर्टिस्ट्स ग्रुप में वाइस-प्रेसिडेंट, आम आदमी पार्टी के सक्रिय सदस्य सम्पादिक पुस्तक: आपकी उड़ान- भाग एक, आम आदमी पार्टी के कवियों की पहली पुस्तक(2013) साहित्यिक लेखन एवं रुचियाँ: कहानी, लघुकथा, गीत, गज़ल, जनक छंद, दोहे, हाइकू, मुक्तक, कुंडलियाँ, छप्पय आदि प्रकाशित कृतियाँ: तीन पीढ़ियाँ: तीन कथाकार(कहानी संग्रह) प्रेमचंद, मोहन राकेश एवं महावीर उत्तरांचाली की 4-4 प्रतिनिधि कहानियाँ, 2007आग का दरिया(ग़ज़ल संग्रह), 2009आग यह बदलाव की(ग़ज़ल संग्रह), 2013मन में नाचे मोर है(जनक छंद संग्रह), 2009, 2014अंतरघट तक प्यास(दोहा संग्रह), 2009बुलंद अशआर(चुनिंदा शेर) 2009 अनेकानेक अन्य सम्पादिक पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    03 सितम्बर 2020
    आपका लेख पढ़कर मेरे आंसू निकल आए।चलो कोई तो मजदूरों के दुख समझता है। रचना बाकमाल है 100/100. आपको भी100 नमन
  • author
    07 जून 2021
    ✅✍️
  • author
    16 अक्टूबर 2018
    अतिउत्तम
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    Manjit Singh
    03 सितम्बर 2020
    आपका लेख पढ़कर मेरे आंसू निकल आए।चलो कोई तो मजदूरों के दुख समझता है। रचना बाकमाल है 100/100. आपको भी100 नमन
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    07 जून 2021
    ✅✍️
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    16 अक्टूबर 2018
    अतिउत्तम