pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

एक लफ्ज़

4.7
803

रास्ते में आज एक लफ्ज़ गिरा मिला वो अनकहा सा कुछ मेरा था या फिर वो जिसे तुमने सुना ही नहीं वर्षों से वो वहाँ वैसे ही पड़ा था जैसे मेरे लबों पे तेरा नाम उसपे पैरों के निशाँ भी थे ठीक वैसे ही जैसे ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
विनायक शर्मा

मुझे ज्यादा जानने के लिए मेरा यूट्यूब चैनल "Sunday wali poem" सब्सक्राइब करें।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Anshul Verma "Avantika"
    02 సెప్టెంబరు 2018
    दिल छू लिया चंद पंक्तियों ने।
  • author
    Arti Jha
    20 ఆగస్టు 2020
    wowww nice
  • author
    Uttam Kanwar
    05 నవంబరు 2018
    भावविभोर।
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Anshul Verma "Avantika"
    02 సెప్టెంబరు 2018
    दिल छू लिया चंद पंक्तियों ने।
  • author
    Arti Jha
    20 ఆగస్టు 2020
    wowww nice
  • author
    Uttam Kanwar
    05 నవంబరు 2018
    भावविभोर।