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एक काली परछाई

4.2
102

"अरे रिया, क्या हुआ, घर अच्छा नही लगा क्या ?" "ऐसी बात नही है समीर, बस मन थोड़ा उदास है" रिया और समीर की शादी को अभी 10 महीने ही हुए थे कि समीर का तबादला किसी दूसरे शहर में हो गया। मायके और ससुराल ...

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लेखक के बारे में
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आयुष जैन

हिंदी साहित्य से स्नातकोत्तर। पढ़ना और लिखना रुचि का विषय।।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    पवनेश मिश्रा
    11 मई 2020
    एक काली परछाई, हॉरर फेस्टिवल के उद्धृत विषय पर आपकी रचनात्मकता की उर्वर उड़ान, सहज शब्द कोष, एवं भावपूर्ण लेखन क्षमता, ने कथानक रचकर, अपने उत्कृष्ठ विचार चिंतक होने का प्रत्यक्ष प्रमाण दिया है, अधिकृत संवेदना के नवल सौम्य चन्द्र की तरह आपकी कीर्ति दसों दिशाओं में सुशोभित, गुंजायमान, हो आयुष जी, बहुत बहुत बधाई 🙏🌹🙏,
  • author
    MEGHA JAIN
    11 मई 2020
    कहानी बेहतरीन है
  • author
    Gaurav Kumar
    24 फ़रवरी 2023
    very very nice story ji
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    पवनेश मिश्रा
    11 मई 2020
    एक काली परछाई, हॉरर फेस्टिवल के उद्धृत विषय पर आपकी रचनात्मकता की उर्वर उड़ान, सहज शब्द कोष, एवं भावपूर्ण लेखन क्षमता, ने कथानक रचकर, अपने उत्कृष्ठ विचार चिंतक होने का प्रत्यक्ष प्रमाण दिया है, अधिकृत संवेदना के नवल सौम्य चन्द्र की तरह आपकी कीर्ति दसों दिशाओं में सुशोभित, गुंजायमान, हो आयुष जी, बहुत बहुत बधाई 🙏🌹🙏,
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    MEGHA JAIN
    11 मई 2020
    कहानी बेहतरीन है
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    Gaurav Kumar
    24 फ़रवरी 2023
    very very nice story ji