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इक बूँद

4.0
727

धुँध भर गई घाटी की वादियों में पेड़ों की क़तारें भी सफ़ेद हो गई, कुछ हिला तो लगा मानों तुम पास से गुज़र गये, मुझे छू गये पर वो इक अहसास भीनी भीनी सी, आँखें उदास गीली गीली सी अगुंली से छू कर देखा तो...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    ભારતી વડેરા
    12 अक्टूबर 2015
    अरुणाजी बहुत सुंदर कविता 
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    17 अक्टूबर 2015
    बहुत सुन्दर, सारयुक्त तथा प्रासंगिक कविता । वाह ! राष्ट्र भाषा का पूरा सम्मान करती है ।
  • author
    Arun Bansal
    22 अक्टूबर 2015
    lovely Poem. Congratulations for getting the poem selected.  
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  • author
    ભારતી વડેરા
    12 अक्टूबर 2015
    अरुणाजी बहुत सुंदर कविता 
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    17 अक्टूबर 2015
    बहुत सुन्दर, सारयुक्त तथा प्रासंगिक कविता । वाह ! राष्ट्र भाषा का पूरा सम्मान करती है ।
  • author
    Arun Bansal
    22 अक्टूबर 2015
    lovely Poem. Congratulations for getting the poem selected.