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एहसान

4.6
1339

"पूजा घर पर आ जाना स्वाति के साथ तुम्हें भी पढ़ा दूंगी ।" नौकरानी की बेटी को यह कहकर खन्ना मैडम ने सोचा चलो इसी बहाने इन पर थोड़ा एहसान भी हो जाएगा मगर पढ़ाते ही उन्हें समझ में आ गया कि पूजा तो स्वाति से कहीं अधिक तीव्र बुद्धि की है सब कुछ आते हुए भी वह स्कूल में नहीं करना चाहती । उन्होंने उसे समझाया तुम स्कूल में अच्छा करोगी तो प्रथम भी आ सकती हो ।इस पर अपनी माँ की समझायी बात पूजा में भोले पन से दोहरा दी -"आप मालिक हो इसलिए मैं स्वाति से ज्यादा नंबर लाकर आप लोगों का अपमान नहीं कर सकती न...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    devaji srivastava
    21 नवम्बर 2020
    विलक्षण सोच एवं सादगीपूर्ण झकझोरने वाली सुंदर लघुकथा।
  • author
    Sp Verma
    14 अप्रैल 2020
    Wonderful.. congratulations
  • author
    Manish Arora
    18 सितम्बर 2019
    Bhaut sundet👍👍👍👍💐💐💐💐
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  • author
    devaji srivastava
    21 नवम्बर 2020
    विलक्षण सोच एवं सादगीपूर्ण झकझोरने वाली सुंदर लघुकथा।
  • author
    Sp Verma
    14 अप्रैल 2020
    Wonderful.. congratulations
  • author
    Manish Arora
    18 सितम्बर 2019
    Bhaut sundet👍👍👍👍💐💐💐💐