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दुर्दशा : एक बहुआयामी चिंतन

3.8
499

देश की दुर्दशा पर सुखद चिंतन मनन पूरा हुआ।अब योगी उठे।बहुत देर से योगी एक ही विचार पर बैठे हुए थे।विचार चुभने लगा था।देश की दुर्दशा पर बोलना उनका प्रिय शगल था। अलश्शाम कुछ पत्रकार उनसे मिलने आ गये ...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    विजय सिंह "बैस"
    15 जुलाई 2019
    सार्थक प्रयास ।
  • author
    Nitish Jha Jha
    04 अप्रैल 2017
    *****
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    विजय सिंह "बैस"
    15 जुलाई 2019
    सार्थक प्रयास ।
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    Nitish Jha Jha
    04 अप्रैल 2017
    *****