कहते हैं क़िताबों से अच्छा और सच्चा कोई दोस्त नहीं होता , क्योंकि ये हमें ज्ञान देती है , वो ज्ञान जो हमे हमारी जिंदगी में कभी ना कभी काम जरूर आता है । मैंने भी जब से इस बात को दिल से समझा है , तब से मैंने भी किताबों से दोस्ती कर ली । और मैं खुद को खुशनसीब मानती हूँ की मेरे पास एक ऐसी दोस्त है जिससे मैं अपने दिल की सारी बातें कह पाती हूँ , और जो मेरे लिए हमेशा उपस्थित रहती है , जो मुझे कभी अकेलापन महसूस नहीं होने देती । जहाँ तक मैं इस बात को मानती हूँ , की किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता और दोस्ती से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता । बस इस रिश्ते को दिल से निभाने की जरूरत होती है ।