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दूर के ढ़ोल सुहावने होते है

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“दूर के ढोल सुहावने होते हैं” दीदी ,आप बिल्कुल सही कह रही थी , ये शहरी जीवन हमारे बस का ना है। सुबह से लेकर शाम तक काम में लगे रहो और काम है कि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही जाता है ,कभी खत्म ही ...

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लेखक के बारे में
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Aparna Garg

शब्द जो दिल को छू जाए, उन्हें गढ़कर दिल मे उतरने की कोशिश करती हू।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Aditi Tandon
    20 मई 2022
    सही कहा अक्सर लोग यही गलती करते हैं और बाद में पछताते हैं अच्छा लिखा है आपने 👌👌👌
  • author
    Dharm Pal Singh Rawat
    20 मई 2022
    बहुत सुंदर।👌👌👌👌👌
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  • author
    Aditi Tandon
    20 मई 2022
    सही कहा अक्सर लोग यही गलती करते हैं और बाद में पछताते हैं अच्छा लिखा है आपने 👌👌👌
  • author
    Dharm Pal Singh Rawat
    20 मई 2022
    बहुत सुंदर।👌👌👌👌👌