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दूध की लालसा

4.6
16562

बाणगंगा नदी पूरे उफान पर थी । उसके दोनों किनारों पर दूर दूर तक अथाह जल राशि दिखाई दे रही थी ।सावन-भादों के महीने में हर साल यह अपने पूरे यौवन पर होती है । आसपास के खेत ज्वार और बाजरा की फसलों से ...

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लेखक के बारे में
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विजय मीणा
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    S K MISHRA
    11 ജൂലൈ 2016
    ''दूध की लालसा '' जैसा कि कहानी के शीर्षक से ही पता चलता है कि कहानी बड़ी रोचक होगी। वास्‍तव में लेखक ने कहानी में जिस तरह से ग्रामीण परिवेश के रहन-सहन का वर्णन किया है वह काबिले-तारीफ है। एक बेहद गरीब परिवार जिसके पास एक दिन जब कंजी नामक भैंस आ जाताी हैतो उनका उत्‍साह देखते ही बनता हैै, परन्‍तु कैलाशी एक खलनायक बनकर उस गरीब परिवार की गरीबी का मजाक उड़ाता है तथा उन्‍हें प्रताड़ित करता हैै। इन सब पात्रों का चयन लेखक ने बड़े़े ही रोचक ढंग से कर इस कहानी में चार चांद लगा दिए हैं।
  • author
    जय नारायण
    07 ജൂലൈ 2016
    बहुत ही बेहतरिन सर, समाज में उपस्थित नकारात्मक कारक किस प्रकार परिस्थिति का लाभ उठाते हैं। भली भाँति समझ आता है .....
  • author
    Ramkishan Neemla
    09 ജൂലൈ 2016
    बहुत ही शानदार ओर जबरदस्त भावात्मक विचार कहानी के माध्यम से चित्रण किया है जो आज भी गावो में साहूकारों ओर ब्याज माफियाओं के द्वारा गरीब लोगों के साथ किया जाता है (सलुक)! येसी कहानियॉ हमें गरीबी के जीवन की वास्तविक स्थिति को सोचने और देखने के लिए मजबूर कर देती है...
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  • author
    S K MISHRA
    11 ജൂലൈ 2016
    ''दूध की लालसा '' जैसा कि कहानी के शीर्षक से ही पता चलता है कि कहानी बड़ी रोचक होगी। वास्‍तव में लेखक ने कहानी में जिस तरह से ग्रामीण परिवेश के रहन-सहन का वर्णन किया है वह काबिले-तारीफ है। एक बेहद गरीब परिवार जिसके पास एक दिन जब कंजी नामक भैंस आ जाताी हैतो उनका उत्‍साह देखते ही बनता हैै, परन्‍तु कैलाशी एक खलनायक बनकर उस गरीब परिवार की गरीबी का मजाक उड़ाता है तथा उन्‍हें प्रताड़ित करता हैै। इन सब पात्रों का चयन लेखक ने बड़े़े ही रोचक ढंग से कर इस कहानी में चार चांद लगा दिए हैं।
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    जय नारायण
    07 ജൂലൈ 2016
    बहुत ही बेहतरिन सर, समाज में उपस्थित नकारात्मक कारक किस प्रकार परिस्थिति का लाभ उठाते हैं। भली भाँति समझ आता है .....
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    Ramkishan Neemla
    09 ജൂലൈ 2016
    बहुत ही शानदार ओर जबरदस्त भावात्मक विचार कहानी के माध्यम से चित्रण किया है जो आज भी गावो में साहूकारों ओर ब्याज माफियाओं के द्वारा गरीब लोगों के साथ किया जाता है (सलुक)! येसी कहानियॉ हमें गरीबी के जीवन की वास्तविक स्थिति को सोचने और देखने के लिए मजबूर कर देती है...