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दो कप चाय

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दो कप चाय  सुबह - सुबह जब नींद खुली ,और मुस्कान जगी , गर्मागर्म चाय की तलब लगी ,तैयार की दो कप चाय , चाय तो थी ,एककप अपने लिए ,दूसरा कप उनके लिए |  खिड़की के पास बैठकर बाहर को झाँका , तो मौसम ...

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लेखक के बारे में
author
Mithlesh Azad

धरती, आकाश, जल और धूप, यही है मेरी कविता का स्वरूप।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Iqra Zeb "writer..✍🏻😇"
    17 अगस्त 2023
    well written ..! 👏👏👏👌👌Mind blowing creation 💓😊👌👌👌👏👏💐💐🍫🍫💓💓💓💐💐💐🍫🍫🍫💓💓👍👍 Excellent poetry..!! we'll done..! 😊😊💓💓👌👌👏👏👏💐💐💐🍫🍫💓💓💓
  • author
    Rekha Jain
    17 अगस्त 2023
    वाह बहुत बहुत सुंदर 👌👌👌💐💐💐
  • author
    Ashwani Kumar
    17 अगस्त 2023
    बहुत सुन्दर रचना बेहतरीन प्रस्तुति 🙏🌹
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  • author
    Iqra Zeb "writer..✍🏻😇"
    17 अगस्त 2023
    well written ..! 👏👏👏👌👌Mind blowing creation 💓😊👌👌👌👏👏💐💐🍫🍫💓💓💓💐💐💐🍫🍫🍫💓💓👍👍 Excellent poetry..!! we'll done..! 😊😊💓💓👌👌👏👏👏💐💐💐🍫🍫💓💓💓
  • author
    Rekha Jain
    17 अगस्त 2023
    वाह बहुत बहुत सुंदर 👌👌👌💐💐💐
  • author
    Ashwani Kumar
    17 अगस्त 2023
    बहुत सुन्दर रचना बेहतरीन प्रस्तुति 🙏🌹