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दो बूँद लहू

4.3
1404

वह दर्द में भी हँसी थी और दो बूँद आँसू सुख के ढलक गए थे गाल पर हजारों सूरज चमके जुगनुओं भरी रात में जब तुम चीखकर रोए और नन्हा सूरज बन उग आए थे जीवन के आकाश में। वह कृत्रिम क्रोध में भी हँसी थी और ...

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लेखक के बारे में
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सरिता कुमारी

शिक्षा- एम. ए. (संस्कृत), इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहबाद कार्यक्षेत्र-भारतीय राजस्व सेवा(आय कर) कृतियाँ - कविता संग्रह- "अनुभूति" (वर्ष 2014), "एक टुकड़ा धूप का"( वर्ष 2015) में प्रकाशित कहानी संग्रह 'उजालों के रंग' शीर्षक से - अनुज्ञा बुक्स, 1/10206,लेन नं. 1E, वेस्ट गोरख पार्क, शाहदरा, दिल्ली -110032, email : [email protected], [email protected], फोन : 011 - 22825424, 09350809192 www : anuugyabooks.com से वर्ष 2018 में प्रकाशित। कई कहानियाँ, 'साहित्य अमृत', प्रतिलिपि. कॉम की ई पत्रिका 'प्रतिलिपि लेखनी', कथाक्रम', 'परिकथा', 'वागर्थ', 'कथादेश',' इंद्रप्रस्थ भारती',' पाखी',' नया ज्ञानोदय', 'निकट', 'आधुनिक साहित्य',' हिन्दी चेतना', 'भवन्स नवनीत', 'कादम्बिनी', 'वार्षिक पुनर्नवा',' वार्षिक लोकमत विशेषांक', समाचारपत्र 'दैनिक जागरण',' जनसत्ता', 'दैनिक भास्कर' आदि में प्रकाशित।

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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Anubhav Singh
    11 अक्टूबर 2015
    "........ तृप्त रहे उपवास में" ........ कविता के माध्यम से मानवीय सद्गुणों की सार्थक अभिव्यक्ति। यही "सद्गुण ही तो knowledge है "
  • author
    रेणु मिश्रा
    15 अक्टूबर 2015
    जीवन अत्यंत मार्मिक क्षणों को पिरोती हुई कविता। साधुवाद मित्र...यूँही लिखते रहिये ?
  • author
    12 अक्टूबर 2015
    बेहतरीन कविता। मानव मन की कोमल भावनाओं का बेबाक और संवेदनशील चित्रण में कवयित्री सफल हुई हैं। 
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    Anubhav Singh
    11 अक्टूबर 2015
    "........ तृप्त रहे उपवास में" ........ कविता के माध्यम से मानवीय सद्गुणों की सार्थक अभिव्यक्ति। यही "सद्गुण ही तो knowledge है "
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    रेणु मिश्रा
    15 अक्टूबर 2015
    जीवन अत्यंत मार्मिक क्षणों को पिरोती हुई कविता। साधुवाद मित्र...यूँही लिखते रहिये ?
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    12 अक्टूबर 2015
    बेहतरीन कविता। मानव मन की कोमल भावनाओं का बेबाक और संवेदनशील चित्रण में कवयित्री सफल हुई हैं।