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हिन्दी

दो बैलों की कथा

4.7
24161

जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : धनपत राय श्रीवास्तव उपनाम : मुंशी प्रेमचंद, नवाब राय, उपन्यास सम्राट जन्म : 31 जुलाई 1880, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) देहावसान : 8 अक्टूबर 1936 भाषा : हिंदी, उर्दू विधाएँ : कहानी, उपन्यास, नाटक, वैचारिक लेख, बाल साहित्य   मुंशी प्रेमचंद हिन्दी के महानतम साहित्यकारों में से एक हैं, आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाने वाले प्रेमचंद ने स्वयं तो अनेकानेक कालजयी कहानियों एवं उपन्यासों की रचना की ही, साथ ही उन्होने हिन्दी साहित्यकारों की एक पूरी पीढ़ी को भी प्रभावित किया और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी कहानियों की परंपरा कायम की|  अपने जीवनकाल में प्रेमचंद ने 250 से अधिक कहानियों, 15 से अधिक उपन्यासों एवं अनेक लेख, नाटक एवं अनुवादों की रचना की, उनकी अनेक रचनाओं का भारत की एवं अन्य राष्ट्रों की विभिन्न भाषाओं में अन्यवाद भी हुआ है। इनकी रचनाओं को आधार में रखते हुए अनेक फिल्मों धारावाहिकों को निर्माण भी हो चुका है।

समीक्षा
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  • author
    rajeev ranjan
    19 நவம்பர் 2018
    बचपन में पढ़ी थी। फिर पढ़ कर यादें ताजी हो गई।मेरी पसंदीदा कहानियों में से एक है।
  • author
    Shivam Verma
    20 ஜனவரி 2020
    6ठी कक्षा में ये कहानी पढ़ी थी...तब बालमन को हिंदी की साहित्यिक विधा से कुछ लेना देना नही था लेकिन ये कहानी बहुत अच्छी लगी...निर्मल हृदय पर ये तब छप गयी 6ठी के बाद कभी भी दोबारा नही पढ़ी, लेकिन आज भी सबकुछ याद है....झूरी, हीरा, मोती, गया और वो दढियल भी मुंशी जी की यही जड़ से जुड़ाव वाली विशेषता ही उन्हें शिखर पर रखती है, उनकी हर कहानी हर आयुवर्ग के लिए है...ये बड़ी बात है
  • author
    Manju Ghritlahare
    20 டிசம்பர் 2018
    भावुक बहुत सुन्दर कहानी लिखी है
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    rajeev ranjan
    19 நவம்பர் 2018
    बचपन में पढ़ी थी। फिर पढ़ कर यादें ताजी हो गई।मेरी पसंदीदा कहानियों में से एक है।
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    Shivam Verma
    20 ஜனவரி 2020
    6ठी कक्षा में ये कहानी पढ़ी थी...तब बालमन को हिंदी की साहित्यिक विधा से कुछ लेना देना नही था लेकिन ये कहानी बहुत अच्छी लगी...निर्मल हृदय पर ये तब छप गयी 6ठी के बाद कभी भी दोबारा नही पढ़ी, लेकिन आज भी सबकुछ याद है....झूरी, हीरा, मोती, गया और वो दढियल भी मुंशी जी की यही जड़ से जुड़ाव वाली विशेषता ही उन्हें शिखर पर रखती है, उनकी हर कहानी हर आयुवर्ग के लिए है...ये बड़ी बात है
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    Manju Ghritlahare
    20 டிசம்பர் 2018
    भावुक बहुत सुन्दर कहानी लिखी है