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दिव्या दृष्टि

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अपने मन केही भीतर समय हुआ है ब्रह्मांड तुम जो भी करम करते हो, अपनी दिव्या दृष्टि से नहीं छुपा सकते नेक नियत रखीए, याद रखिए ब्रह्मांड में ईश्वर हर जगह है

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लेखक के बारे में
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Kusum Meena

मुझे कविताएं लिखना और पढ़ना बहुत अच्छा लगता है मैं ग्रहणी हूं, मुझे पाक कला का बेहद शौक है मेरा टिफिन सर्विस है

समीक्षा
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  • author
    KAJAL Chaudhary "Miss Chaudhary"
    21 May 2025
    बिल्कुल सही कहा आपने 👌👌
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    KAJAL Chaudhary "Miss Chaudhary"
    21 May 2025
    बिल्कुल सही कहा आपने 👌👌