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दिनचर्या

4.6
355

सुबह नींद टूटी , 6 बजे , अलार्म से ; क्यूंकि 7 बजे जाना होता है हर दिन अपने काम से || अब मै नहीं ध्यान देता पक्षियों की गुनगुनाहट पे ; हवा के झोंको पे , या पत्तियों की सरसराहट पे || मैं नियमित हो ...

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लेखक के बारे में
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मयंक मिश्रा
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    20 दिसम्बर 2018
    बेहतरीन👍 हर मर्द का दर्द लिख दिया आपने तो
  • author
    BHUSHAN KHARE
    17 मई 2018
    बहुत अच्छी रचना
  • author
    Aradhaya Triphati
    12 जून 2021
    waw
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    20 दिसम्बर 2018
    बेहतरीन👍 हर मर्द का दर्द लिख दिया आपने तो
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    BHUSHAN KHARE
    17 मई 2018
    बहुत अच्छी रचना
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    Aradhaya Triphati
    12 जून 2021
    waw