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दिल से दिल का रहा वास्ता इसलिए

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दिल से दिल का रहा वास्ता इसलिए कर दिया शुक्रिया आपका इसलिए मुझसे महबूब मेरा मिला ही नहीं याद का फूल दिल में खिला इसलिए कोई पत्थर पिघल जाए सुनकर इसे अश्क ने आज सब-कुछ कहा इसलिए शर्म आये तो पढ़ ले मेरी...

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लेखक के बारे में
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रेणु मिश्रा
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    रविंद्र कुमार
    02 जुलाई 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
  • author
    15 दिसम्बर 2018
    उम्दा प्रस्तुति ।प्रतिलिपि कथा सम्मान के लिए मेरी कहानियां पढ़कर टिप्पणी दें
  • author
    Jai Sharma
    02 नवम्बर 2023
    राधे राधे रेणु जी वाह वाह क्या खूब कहा आपने जी
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    रविंद्र कुमार
    02 जुलाई 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
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    15 दिसम्बर 2018
    उम्दा प्रस्तुति ।प्रतिलिपि कथा सम्मान के लिए मेरी कहानियां पढ़कर टिप्पणी दें
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    Jai Sharma
    02 नवम्बर 2023
    राधे राधे रेणु जी वाह वाह क्या खूब कहा आपने जी