शहर में शोर है भोर भोर है तभी एक दिया कहीं किसी ने जला दिया हुज़ूर ने देख कर ये कहा वज़ीर को कौन नीच था ये जो कौम को जगा दिया पर हुज़ूर ये तो था बस एक दिया , बस एक दिया कौम को पता है ये आपने ...
मैं अमित हूँ ,पेशे से वकील पर तबियत से शायर । आप साथियों ने कुछ रचनाएं पसंद की तो हिम्मत हुई यहां तक आने की। रचनाएं पढ़ने की लिए दिल से शुक्रिया और आपकी प्रतिक्रियाओं का बेसब्री इंतजार रहेगा।
सारांश
मैं अमित हूँ ,पेशे से वकील पर तबियत से शायर । आप साथियों ने कुछ रचनाएं पसंद की तो हिम्मत हुई यहां तक आने की। रचनाएं पढ़ने की लिए दिल से शुक्रिया और आपकी प्रतिक्रियाओं का बेसब्री इंतजार रहेगा।
रिपोर्ट की समस्या