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दिए की मौत

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शहर में शोर है भोर भोर है तभी एक दिया कहीं किसी ने जला दिया हुज़ूर ने देख कर ये कहा वज़ीर को कौन नीच था ये जो कौम को जगा दिया पर हुज़ूर ये तो था बस एक दिया , बस एक दिया कौम को पता है ये आपने ...

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लेखक के बारे में
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अमित यादव

मैं अमित हूँ ,पेशे से वकील पर तबियत से शायर । आप साथियों ने कुछ रचनाएं पसंद की तो हिम्मत हुई यहां तक आने की। रचनाएं पढ़ने की लिए दिल से शुक्रिया और आपकी प्रतिक्रियाओं का बेसब्री इंतजार रहेगा।

समीक्षा
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  • author
    मुकेश आनंद
    18 जुलाई 2020
    बहुत सुंदर और समसामयिक
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    मुकेश आनंद
    18 जुलाई 2020
    बहुत सुंदर और समसामयिक