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धुंधलका

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4.5

बहुत कोशिश के बाद धुंधल्के तक पहुँचा था दिन दोपहर के गर्म मिज़ाज को पी लिया था उसने शाम से मिलने की आस में उसके जैसे दिखने की कोशिश थी उसकी शाम भी मिलाना चाहती थी उससे रंगो का इंद्रधनुष भी बन रहा था...