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धोता हूँ जब मैं पीने को उस सीमतन के पाँव

4.2
2363

धोता हूँ जब मैं पीने को उस सीमतन के पाँव रखता है ज़िद से खेंच कर बाहर लगन के पाँव दी सादगी से जान पड़ूँ कोहकन के पाँव हैहात क्यों न टूट गए पीरज़न के पाँव भागे थे हम बहुत सो उसी की सज़ा है ये होकर...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : मिर्ज़ा असदउल्ला बेग़ ख़ान ग़ालिब जन्म : 27 दिसंबर 1796, आगरा (उत्तर प्रदेश) भाषा : उर्दू, फ़ारसी विधाएँ : गद्य, पद्य निधन - 15 फरवरी 1869, दिल्ली

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    SHALINI GUPTA
    12 जून 2022
    💐💐
  • author
    ranbir singh
    01 फ़रवरी 2020
    बहुत खूब
  • author
    Kumar durgesh Vikshipt *Vaishnav*
    27 दिसम्बर 2018
    🙏
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    SHALINI GUPTA
    12 जून 2022
    💐💐
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    ranbir singh
    01 फ़रवरी 2020
    बहुत खूब
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    Kumar durgesh Vikshipt *Vaishnav*
    27 दिसम्बर 2018
    🙏