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धंधा

4.3
20527

सुंदरता कहीं भी रहे, लोगों की नजरों से बच नहीं सकती। तभी तो ”धारावी“ जैसे गंदे इलाके में भी कार आकर रूक जाती। झुग्गीवालों के लिए कार का आना अब कोई अजूबा नहीं रहा। एक जमाना था जब इस इलाके में कार आती ...

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लेखक के बारे में

' एयर इंडिया ' से डिप्टी मैनेजर के पद से सेवानिवृत्ति ।अब बस लेखन ।अब तक एक लघुकथा संग्रह " टुकड़ा टुकड़ा सच " ( 2011) में प्रकाशित ।अब तक साझा तौर पर कविता संकलन, लघुकथा संग्रह एवं कहानी संग्रह की चार पुस्तकें प्रकाशित । पता -- 601 महावीर दर्शन सोसायटी, प्लाट नंबर - 11C सेक्टर -20 खारघर नवी मुंबई -410210 mob 9619025094

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Meena Bhatt.
    03 अप्रैल 2019
    धंधा-----धंधा कानों में बस यही शब्द बोल रहे हैं।कलम में काफ़ी शक्ति है दिल में उतर गई आप की कहानी।शुभकामनाएं
  • author
    srishti singh
    04 मार्च 2017
    bhut acchi story , smaj ka kdwa sach dikhaya h
  • author
    rekha
    31 अगस्त 2018
    यह कहानी यथार्थ का चित्रण है। समाज में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो ऐसा जीवन जी रहीं है। कजरी जैसी महिलाएं कभी महिला दिवस मना पाएगी?
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    Meena Bhatt.
    03 अप्रैल 2019
    धंधा-----धंधा कानों में बस यही शब्द बोल रहे हैं।कलम में काफ़ी शक्ति है दिल में उतर गई आप की कहानी।शुभकामनाएं
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    srishti singh
    04 मार्च 2017
    bhut acchi story , smaj ka kdwa sach dikhaya h
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    rekha
    31 अगस्त 2018
    यह कहानी यथार्थ का चित्रण है। समाज में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो ऐसा जीवन जी रहीं है। कजरी जैसी महिलाएं कभी महिला दिवस मना पाएगी?