धान रोपती औरतें आंचलिक भाषा में गाती हैं जीवन के गीत अबोध शिशु की तरह पुलक उठ्ता खेत का मन उसके हाथ के स्पर्श से बड़े जतन से फटे हाथों से रोपती हैं धान पानी में साथ में रोपती भात ,रोटी, कपड़े और टुटे...
waah bhawna ji waah :) kaash main bhi aap jitna achcha likh paata . fan ban gaya hu aapka. par please aur poem bhi post kijiye . aapki 2 poem ne pyaas jagaa dee hai :)
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