देखा जबसे हमने
उनका वो प्यारा सा चेहरा
बेताब है उस दिन के लिये
जब बांध के आयेंगे वो सेहरा
भटकता था जो दिल ये हमारा
ढूःढता रहता जो साथी बेचारा
उनकी प्यार भरी निगाहों ने
दे दिया दिल को सहारा
उनके सिवा ...
जी यह आप की सोच बहुत अच्छी थी पर स्पेज देकर लिखना चाहिए यदि बुरा ना माने तो उधारण से समझाते है जो आप ने लिखा वह दाल चावल था अलग अलग पर आप ने उसको खिचडी बना दी फिर भी जो भी पढेगा आप की सोच को अच्छा कहेगा आप अच्छा लेख सोचती है बेहतर होगा आप ऐसी सोच को दाल चावल से देखे खिचडी से नही वरना आचार्य अनिवार्य है खिचडी मे यानी लेख के लिए एक टिचर या जानकार लेखक धन्यवाद
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जी यह आप की सोच बहुत अच्छी थी पर स्पेज देकर लिखना चाहिए यदि बुरा ना माने तो उधारण से समझाते है जो आप ने लिखा वह दाल चावल था अलग अलग पर आप ने उसको खिचडी बना दी फिर भी जो भी पढेगा आप की सोच को अच्छा कहेगा आप अच्छा लेख सोचती है बेहतर होगा आप ऐसी सोच को दाल चावल से देखे खिचडी से नही वरना आचार्य अनिवार्य है खिचडी मे यानी लेख के लिए एक टिचर या जानकार लेखक धन्यवाद
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