दीप तले अंधेरा... क्यों हो रही बार बार कुदरत कुपित रहता कोई अनजाने से भय से मन कंपित... दूर दूर तक फैला है खामोशियों का मंज़र आये है जो तूफ़ान गए है उससे कितने घर बिखर... दर्द को इतनी बार गया था ...
मैं पेशे से एडवोकेट हूँ पर पढ़ना और लिखना मेरा शौक है......प्रतिलिपि एक ऐसा माध्यम है जिसकी वजह से मैं अपने मन कि भावनाओं को रचनाओं के द्वारा लोगो तक पंहुचा सकती हूँ.....
मेरी सभी रचनाएँ स्वरचित और मौलिक है और सर्वाधिकार सुरक्षित है ll
तथा कॉपी राइट एक्ट के अंतर्गत प्रस्तावित है l
अन्यथा की स्थिति मे हाई कोर्ट लखनऊ बेंच में कार्यवाही की जाएगी..l सुषमा सिंह (एडवोकेट )
सारांश
मैं पेशे से एडवोकेट हूँ पर पढ़ना और लिखना मेरा शौक है......प्रतिलिपि एक ऐसा माध्यम है जिसकी वजह से मैं अपने मन कि भावनाओं को रचनाओं के द्वारा लोगो तक पंहुचा सकती हूँ.....
मेरी सभी रचनाएँ स्वरचित और मौलिक है और सर्वाधिकार सुरक्षित है ll
तथा कॉपी राइट एक्ट के अंतर्गत प्रस्तावित है l
अन्यथा की स्थिति मे हाई कोर्ट लखनऊ बेंच में कार्यवाही की जाएगी..l सुषमा सिंह (एडवोकेट )
रिपोर्ट की समस्या
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