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दर्दे दिल ....

4.7
511

दर्दे दिल ,लिखने से बयां नहीं होती वो चेहरे पे स्वतः छप जाया करती है ये बीते दिन स्वप्न से हैं न तेरे हैं ,न मेरे हैं बैरन समय के किस्से हैं हम तो इक लम्हा बस झपकते पलों के साथ गुजर जायेंगे कभी। ...

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लेखक के बारे में

अनुराधा अनुपम

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    तनुज
    16 जुलाई 2021
    अहा! कितना सुंदर और मन को भेदकर तडफाने वाला है ये 'दर्दे दिल...' 🔥 तस्वीर में जो जड जाये उसको दिल से ही या फिर मौन होकर महसूस करो, तो शायद वह सुनेगा अवश्य...🍁🙏
  • author
    17 अक्टूबर 2021
    दिल से रचना लिखे तो सुंदर बन जाती है जी।जैसे आपने लिखी।लाजवाब रचना।
  • author
    Sudarshan Prasad
    29 मार्च 2019
    true poetry . it should be understood everyone.
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    तनुज
    16 जुलाई 2021
    अहा! कितना सुंदर और मन को भेदकर तडफाने वाला है ये 'दर्दे दिल...' 🔥 तस्वीर में जो जड जाये उसको दिल से ही या फिर मौन होकर महसूस करो, तो शायद वह सुनेगा अवश्य...🍁🙏
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    17 अक्टूबर 2021
    दिल से रचना लिखे तो सुंदर बन जाती है जी।जैसे आपने लिखी।लाजवाब रचना।
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    Sudarshan Prasad
    29 मार्च 2019
    true poetry . it should be understood everyone.