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दर्द

4.5
719

जज्बात भीग रहे थे नैनो से दिख रहे थे फिर भी लोगों के हुजूम उसपे चीख रहे थे बुढ़िया अपनी आपबीती कहे भी तो किससे कहे किन-२ दर्दों को एकसाथ सहे वो वो जो कहने को तो उसके अपने थे वो भले मानुष हैं ऐसे...

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लेखक के बारे में
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टी एन पांडेय
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Devil😈
    30 मार्च 2020
    good keep it up
  • author
    16 जुलाई 2018
    waw superb quality
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    24 मार्च 2022
    अपनों द्वारा दिए दर्द की अत्यन्त ही मार्मिक अभिव्यक्ति ।
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    Devil😈
    30 मार्च 2020
    good keep it up
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    16 जुलाई 2018
    waw superb quality
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    अरविन्द सिन्हा
    24 मार्च 2022
    अपनों द्वारा दिए दर्द की अत्यन्त ही मार्मिक अभिव्यक्ति ।