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दराज़

4.1
256

एक दराज़ खोली है आज मैंने, कुछ चुरमुराती सी अवाज के साथ, धक्के के बाद एक दराज़ खोली है आज मैने, धूल को हटा जैसे ही हाथो को अन्दर डाला; कुछ पुराने मटियाये से, दोस्तो ने हस कर हाथो को चूम लिया: ...

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लेखक के बारे में
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Avnish Singh Baghel

यार बड़ी धूप है यहा, आओ कही सुस्ताते है; मन बेचैन है मेरा और तुम्हारा भी, चलो, कुछ किस्से तुम हमे बताओ: कुछ हम तुम्हे अपने सुनाते है

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    #The golden eagle studio
    28 दिसम्बर 2018
    अपनी अपनी दराजे अलग होती हो गी? या नही |
  • author
    Sumedha Prakash
    09 अक्टूबर 2018
    वाह वाह
  • author
    mkumar jureshiya "बहादुर"
    13 जुलाई 2020
    दराज की राज बहुत अच्छी है
  • author
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  • author
    #The golden eagle studio
    28 दिसम्बर 2018
    अपनी अपनी दराजे अलग होती हो गी? या नही |
  • author
    Sumedha Prakash
    09 अक्टूबर 2018
    वाह वाह
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    mkumar jureshiya "बहादुर"
    13 जुलाई 2020
    दराज की राज बहुत अच्छी है