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""डाकिया डाक दे गया""

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सपनो के अपनो मे अपनो के तपनो मे कोई हाथों में हाथ दे गया डाकिया डाक दे गया मेरी रातो की नींद ले गया डाकिया डाक दे गया मोहब्बत एक अहसासो की पावन सी कहानी है कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी थी ...

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लेखक के बारे में
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Aamin (ITTAFAQ)

Human nature, nature and natural beauty can't be changed.

समीक्षा
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  • author
    Tarak
    28 मई 2019
    ખુબ જ સરસ
  • author
    anurag pal "Dhiraj"
    01 मई 2022
    कृपया कर इस तथ्य को समझे की जो आपने ये कविता लिखी है इसमें पहली दो पंक्तियां विष्णु सक्सेना जी की हैं और शेष कविता कुमार विश्वाश जी की है l और इधर उधर की कई कविताएं को गलत तरीके से भी लिखा है जो की किसी भी ढंग से सही नही है वर्तनी की भी अशुद्धि अधिक मात्रा में है
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    Tarak
    28 मई 2019
    ખુબ જ સરસ
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    anurag pal "Dhiraj"
    01 मई 2022
    कृपया कर इस तथ्य को समझे की जो आपने ये कविता लिखी है इसमें पहली दो पंक्तियां विष्णु सक्सेना जी की हैं और शेष कविता कुमार विश्वाश जी की है l और इधर उधर की कई कविताएं को गलत तरीके से भी लिखा है जो की किसी भी ढंग से सही नही है वर्तनी की भी अशुद्धि अधिक मात्रा में है