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दफन

3.7
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मेरा पुश्तैनी मकान गौरैया व कबूतरों की रौनक से गुलजार था। बोगन बोलिया में वो चीं-चीं की सुरीली बोली का अनुपम संगीत बिखेरतीं। आंगन में चहकतीं, रोशनदान व खिड़कियों पर फुदकतीं तथा सूखनं को फैलाये ...

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समीक्षा
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  • author
    Aarti Sharma
    08 जुलाई 2019
    How sad par last me achha tha.hopeful story
  • author
    Manish Arora
    12 अक्टूबर 2019
    💐👍👍kash phle utrwa diya hota
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    Aarti Sharma
    08 जुलाई 2019
    How sad par last me achha tha.hopeful story
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    Manish Arora
    12 अक्टूबर 2019
    💐👍👍kash phle utrwa diya hota