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चुनावी चकल्लस : गांव कनेक्शन

4.2
2193

आज सवेरे से ही गांव भर की हवा टाइट है.चुनावी चहल पहल है.मतदान का दिन है.प्राइमरी स्कूल के पीछे बने तालाब में कोई झाड़े फिरने नहीं गया है.फ़ौज का आदमी डूटी पर है.ननकऊ की दुल्हिन जब सवेरे सवेरे निकरी थी ...

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लेखक के बारे में
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शशांक भारतीय

अपने और अपने आसपास के बीते हुवे पलों को कहानी और कविताओं का रूप देने की एक अदना कोशिश करता हूँ. अब तक के खुद को उपन्यास "dehaati ladke" में पूरा उतार दिया है. बाकी का मैं बन रहा हूँ...

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    26 മെയ്‌ 2017
    Good one ..kapuriya language i like it
  • author
    नितेश झा
    20 ജൂണ്‍ 2019
    बहुत खुशी हो रही है कि आप यहां भी मिल गए। यह तो आपके उपन्यास का ही नशा है कि हमने आपको ढूंढ लिया। अभी आपकी 12 और रचनाएं पढ़नी है... वाकई गांव की याद आ गई। सचमुच चुनाव लोकतंत्र का त्यौहार होता है
  • author
    अरुण
    20 ഏപ്രില്‍ 2017
    गांव मे चुनाव का बहुत सुंदर चित्रण किया है शशांक जी....बहुत उम्दा..
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    26 മെയ്‌ 2017
    Good one ..kapuriya language i like it
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    नितेश झा
    20 ജൂണ്‍ 2019
    बहुत खुशी हो रही है कि आप यहां भी मिल गए। यह तो आपके उपन्यास का ही नशा है कि हमने आपको ढूंढ लिया। अभी आपकी 12 और रचनाएं पढ़नी है... वाकई गांव की याद आ गई। सचमुच चुनाव लोकतंत्र का त्यौहार होता है
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    अरुण
    20 ഏപ്രില്‍ 2017
    गांव मे चुनाव का बहुत सुंदर चित्रण किया है शशांक जी....बहुत उम्दा..