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चूहा बिल्ली का खेल!!

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प्रतिस्पर्धी दुनिया के जीवन रूपी इस चूहे बिल्ली के खेल में कोई भी इंसान किसी का सगा नही रहा। सब के सब सब एक दूसरे से छत्तीस का आंकड़ा रखते हैं। किसी के  लिए चूहे जैसा व्यवहार रखने वाला इंसान कब  ...

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लेखक के बारे में
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मानव

उसका लज्जा से सिमट जाना उसकी पवित्रता की गवाही दे रहा था। मेरी नजरें उसकी मदमस्त आंखों पर टिकीं थीं। उसके लाल गुलमोहर के जैसे होंठ मुझे बेचैन कर रहे थे। उसे बांहों में भरने की तीव्र इच्छा हो रही थी। मन में कामुकता का ज्वार हावी हो था। रह रहकर प्रचंड लहरें हृदय की धड़कन को बढ़ा रहीं थीं। मै डर रहा था कि मेरे छूने से वो मुरझा न जाए....

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    20 मार्च 2022
    🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने 🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️ 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞
  • author
    Surbhi Gupta
    14 मार्च 2022
    बिल्कुल सही कहा आपने
  • author
    deepak sharma
    13 मार्च 2022
    अति उत्तम💯✨ जय श्री राधे राधे जी🙏
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    20 मार्च 2022
    🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने 🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️ 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞
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    Surbhi Gupta
    14 मार्च 2022
    बिल्कुल सही कहा आपने
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    deepak sharma
    13 मार्च 2022
    अति उत्तम💯✨ जय श्री राधे राधे जी🙏