"ए चाय, चाय ....... "दस रुपये में एक चाय , खुद भी पियो अपने साथियों को भी पिलाओ और ठंड से सबको बचाओ" कड़क मसाला मार के ...... ए चाय, चाय........ मैं हिमांचल की सैर के लिए निकला था कलकत्ते से वो ...
( ये दुनियाँ एक रंग मंच है ☺️ और मैं एक बेहतरीन अदाकारा हूँ..)
भीतर जमें कंकड़ को बिखेरती, समेटटी
सँवारती , नवाजती
हर मोड़ पर खुद के लिए रास्ता निकालती
पत्थरों के ठोकरों से खुद को सम्हालती
बह रही है सरी
और बहती चली जायेगी.....
प्रतिलिपि पुरस्कार------
1--लेखन मैराथन
2--शार्ट स्टोरी चैलेंज- कहानी ( परदोष )
3--मूड ऑफ द मंथ- कहानी ( स्वदेश )
सारांश
( ये दुनियाँ एक रंग मंच है ☺️ और मैं एक बेहतरीन अदाकारा हूँ..)
भीतर जमें कंकड़ को बिखेरती, समेटटी
सँवारती , नवाजती
हर मोड़ पर खुद के लिए रास्ता निकालती
पत्थरों के ठोकरों से खुद को सम्हालती
बह रही है सरी
और बहती चली जायेगी.....
प्रतिलिपि पुरस्कार------
1--लेखन मैराथन
2--शार्ट स्टोरी चैलेंज- कहानी ( परदोष )
3--मूड ऑफ द मंथ- कहानी ( स्वदेश )
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