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चोरी

4.3
3253

वह इधर-उधर भटक रहा था। शायद बेमतलब या हो सकता है मतलब से भी। पिछले तीन दिन से वह कोई चोरी नहीं कर पाया था। मिनिस्टर साहब को भी अभी आना था। जाते किसी और बड़े शहर में, आराम से चुनावी रैली करते, ...

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लेखक के बारे में

प्रकाशित पुस्तकें:- (कविता संग्रह) क्योंकि मैं औरत हूँ (कहानी संग्रह) समुद्र की रेत, मन का मनका फेर, सात दिन की माँ (उपन्यास) अबकी नौकरी छोड़ दूँगी, सिंहासन का शीशा

समीक्षा
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  • author
    Manish panot
    05 जनवरी 2019
    कहानी दो पल मे पढली मगर हमेशा के लिए जैसे ज़ेहन मे छप गयी। इंसानी दीमाग और फिदरत को बहोत खूब बया किया है आपने । शुक्रिया ।
  • author
    Suny Agarwal
    04 जून 2019
    bahut bahut bahut badiya majaa aa gayaa pad kar pranaam 🙏🙏🙏 hai aapki lekhni ko...
  • author
    25 दिसम्बर 2018
    बहुत मजा आया ... बहुत अच्छे
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    Manish panot
    05 जनवरी 2019
    कहानी दो पल मे पढली मगर हमेशा के लिए जैसे ज़ेहन मे छप गयी। इंसानी दीमाग और फिदरत को बहोत खूब बया किया है आपने । शुक्रिया ।
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    Suny Agarwal
    04 जून 2019
    bahut bahut bahut badiya majaa aa gayaa pad kar pranaam 🙏🙏🙏 hai aapki lekhni ko...
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    25 दिसम्बर 2018
    बहुत मजा आया ... बहुत अच्छे