चित्र अभिव्यक्ति शीर्षक - कच्चे घर वाली जिंदगी कहॉं खो गया वह खुला ऑंगन था जो बीच में बना सॉंझा चुल्हा सबका था वो मॉं, चाची, ताई सब रोटी सेंकती थी प्यार भरे दिल थे, खिली खिली धूप कुलॉंचे मारता बचपन, ...
सुंदर हमारे गांव की चित्र अभिव्यक्ति ...क्योंकि भाई सबमें डॉक्टरहोन साथ किसान की पत्नी हूं और इस ही गांव में मेरा घर अभी भी है .....👌👌👌👌👌✅✅✅✅✍️✍️✍️🙏🙏🤗🤗🥰🥰🥰🤔🤔🤔🤔पर अब हमारे गांव के आस पास कई टाउनशिप बन गई है।
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