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छली गदहा

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छली गधा गधा एक था चरता वन में।        बड़ा कपट था उसके मन में।। कहीं सिंह का चमड़ा पाया।         उससे उसने रूप बनाया।। सबको डर दिखलाता था वह।       अच्छे मजे उड़ाता था वह।। चर जाता था सबके खेत। ...

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लेखक के बारे में
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Brijesh Pandit
समीक्षा
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  • author
    ADIL KHAN
    18 जुलाई 2023
    इसी की तो तलाश थी बचपन से. और एक बंदर मामा लिये गँड़ासा चले काटने पेड़. पता नहीं मिलेगी या नहीं
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    ADIL KHAN
    18 जुलाई 2023
    इसी की तो तलाश थी बचपन से. और एक बंदर मामा लिये गँड़ासा चले काटने पेड़. पता नहीं मिलेगी या नहीं